सब कुछ बदल गया है
- Hashtag Kalakar
- Aug 13, 2025
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By Abha Vishwakarma
सब कुछ बदल गया है
अब मेरे शहर में
चाँद उदास हो गया है
सूरज की रोशनी
दूर-दूर तक नहीं फैलती
आकाश का नीलापन
कहीं खो गया है
पेड़-पौधे हरे-भरे नहीं दीखते
नदियाँ बिना गीत गुनगुनाए बह्ती हैं
सब कुछ बदल गया है
मेरे शहर में ।
अब माएँ
चुप और खामोश रह्ती हैं
जवान लड़कियाँ डरी और सहमी
थके हारे पिता
शाम को जब घर लौटते हैं
तो कुछ नहीं बोलते
भाभियों की कलाईयों में
रंग- बिरंगी चूड़ियाँ नहीं खनकती
और
अब बच्चों ने सीख लिया है
पतंग उड़ाना घरों के भीतर ।
अब-
आये दिन गोलियाँ चलती हैं
दिन-दहाडे़ खून खराबा होता है
अब-
सुरक्षित नहीं है माँ बहनों की इज्ज़त
और,
गुमराह कर दिये गये हैं
जवान लड़के ।
हम देखते हैं सब कुछ
और बन्द कर लेते हैं चुपचाप
अपने घरों की
खिड़कियाँ और दरवाज़े ।
सब कुछ बदल गया है
मेरे शहर में और शायद हम भी ।
By Abha Vishwakarma

Lines that really touch
Excellent
Nice one
Very realistic lines in today's world. Very thoughtful poem
Excellent