वृक्ष बेचारा
- Hashtag Kalakar
- 5 days ago
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By Sangeeta Singh
मानव वृक्ष पर कुल्हाड़ी धार से,
प्रहार पर प्रहार कर रहा,
भय रुदन रस- बूंद गिर रहा ।
काक कर्कश ध्वनि में,
कॉंव-कॉंव कर चिल्ला रहा,
लगता है मेरा आशियाना जा रहा ।
भंवरा,तितली, चींटी, कीट-पतंगे, गिरगिट
तोता-मैना, बुलबुल,गौरैया, गिलहरी
सब स्तब्ध-भाव से देख रहे ।
प्रकृति की हरित आकृति को विकृत
करता मानव पाषाण हृदय को पता नहीं,
सृष्टि के जीवन चक्र पर
धारदार प्रहार कर रहा,
उसमें आत्म-ग्लानि का बोध नहीं ।
पर्यावरण का हरण हो रहा,
उसमें सृजन का भाव नहीं,
तरु-बेचारा,
मानव मन-गति अनुकूल जी रहा,
धरा-पुत्र की भावना से बीज उग कर,
फल,छाया, हरियाली दे रहा वृक्ष बेचारा ।
By Sangeeta Singh

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