वजूद के तिनके
- Hashtag Kalakar
- 7 days ago
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By Sobia Rashid
मुद्दतें लगती हैं सिमटने में,
कोई यूँ ही वजूद को तिनको में बिखेर देता हैं|
सदियों से सीचे यकीन को,
यूँही यतीम कर देता है;
कोई शक्स रूह घायल कर देता है|
जगमगाती महफ़िलो में हो खामोश मुस्कुराहट -
किसे पता - कोई अंदर ही अंदर चीख देता है!
यह मंज़र दिल और जहाँ को झकझोर देता है;
कोई कैसे किसी की रूह ज़ख़्मी कर देता है?
इस दिल के दरमियाँ है सैलाब उमड़ रहे -
कोई कैसे ज़िंदगियो से खेल लेता है?
ना अपनो का, ना बेगानो का छोड़ देता है;
वो है कोई जो –
ना जीने में, ना मरने में छोड़ देता है|
इस जंग-ए-ज़िंदगी के बोहुत हैं ख़सारे -
कोई नफ़रातों से जुनून देता है;
वो क्या जाने, वो खुद ही बर्बाद करके खुशी देता है|
By Sobia Rashid

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