रूह ए पाक
- Hashtag Kalakar
- Aug 11, 2025
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By Riya Omar
महफिलों में दिलचस्पी हमें थी ही कब
वो तू बस उनके दीदार का जरिया है
सारे जहां की रौनकें फीकी है
उस नूर के सामने
वो झील सी गहरी आँखें
जिसमें खो जाने के बाद
कुछ और मिले ये आरजू ही खत्म हो जाए
एक ऐसी मुस्कुराहट चेहरे पर
दिल की सादगी बया हो जाए
रूह ए पाक
By Riya Omar

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