यह डिजिटल दुनिया का दौर है
- Hashtag Kalakar
- Jan 10, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 15, 2025
By Vijay Dilip Patil
हजारों राहे हैं
सौ दिशाएं है
पर टिकती नहीं नजर एक मंजिल पर
भटकी भटकी से निगाहें है
जाने कहां इस पतंग की डोर है
न जाने कहा दूसरा छोर है
यह डिजिटल दुनिया का दौर है
गुरुत्वाकर्षण से भी ज्यादा खिंचाव का मोह जाल है
हर किसी का हाल बदहाल है
वर्चुअल दुनिया का अलग ही बवाल है
Rat रेस की लगी होड़ है
यह डिजिटल दुनिया का दौर है
पता ही नहीं चलता कब गुजरती रात और कब होती भोर है
तनहाई में भी मचा शोर है
न जाने कैसी लगी यह दौड़ है
यह डिजिटल दुनिया का दौर है
डिजिटल दुनिया में तो रहता हूं मैं आजकल
सांसे मगर फिर भी ऑक्सीजन ही मांगती है
मेडिटेशन के हजार वीडियो मिलते हैं यूट्यूब पे
पर न जाने कहां खोई खोई शांति है
चित सबका चुरा ले गया कौन ऐसा चितचोर है
यह डिजिटल दुनिया का दौर है
By Vijay Dilip Patil

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