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मोहब्बत का कफ़न

By Khushbu Vandawat


जो मुक़द्दर में नहीं होता,

उनसे मोहब्बत भी कमाल होती है।

दिल टूटता है इस क़दर,

जैसे काँच का गिलास चूर-चूर होती है।

तुम देखते इस क़दर थे कि,

हम भी तुम्हें देखते रह गए।

बदक़िस्मती है कि हम इस समाज का हिस्सा हैं,

जिसके बोझ तले हम दबे रह गए।

दिल शीशा है, संभाल रखना,

मोहब्बत करो तो कफ़न तैयार रखना।

क्योंकि जब टूटता है दिल,

तो हर एहसास में ख़ामोशी दफ़्न होती है।

तुम इज़हार तो करोगे,

हम इकरार नहीं कर पाएंगे।

तुम ऐतबार तो करोगे,

हम इकरार नहीं कर पाएंगे।

भूल जाना हमें,

हम दो किनारे हैं — कभी एक नहीं हो पाएंगे।


By Khushbu Vandawat


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Emotional

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crazy Aaglecha
crazy Aaglecha
5 days ago
Rated 4 out of 5 stars.

Love is always in profit, we know society is against thought of fly in love but in my opinion

आंसु,दर्द, ज़ख्म दहलीज ए तैयार रहता हे।

अंत में कुछ नहीं बचता,बस प्यार रहता हे।।

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vandawatkhushbu
6 days ago
Rated 5 out of 5 stars.

nice and emotional poem i love it


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vandawatkhushbu
6 days ago
Rated 5 out of 5 stars.

truly heart touching

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