मेरे सब्र
Updated: Jul 16, 2025
By Naveen Kumar
तलाश पूरी हो तो, सब्र करूं
कुछ मिल भी जाएं तो, सब्र करूं
दिखता नहीं, न जाने कहां है छिपा
वो जो खो गई, पहचान मेरी
मिल जाए तो, सब्र करूं
जलती धूप में, थोड़ी छांव मिले तो, सब्र करूं
ख़्वाबों का एक मुकाम भी मिले तो, सब्र करूं
चलते रहते है, इधर से उधर न जाने किधर
मंजिल के निशा भी मिले तो, सब्र करूं
लिखते कलम को जो आराम मिले तो, सब्र करूं
बहते अल्फ़ाज़ जो रुके कभी तो, सब्र करूं
मेरा किरदार अब भी है राहों में
जो मेरी कहानी पूरी हो तो, सब्र करूं…
By Naveen Kumar

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