मेरे दोस्त
- Hashtag Kalakar
- Jan 11, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 17, 2025
By Smita Roy
तो आज उनके बारे मे कुछ कहना है
जिनके आने से जिंदगी हसीन हो गई।
ये मेरे महबूब नहीं, ये है मेरे बचपन के दोस्त।
की ये यारियाँ फिल्म का दोस्ताना नहीं
तुम लोगों का अलग है अफसाना।
की परेशानियों पे जम कर हसना
फिर मिलकर उसे सुलझाना।
किसी की तबीयत जरा सी नासाज हो
तो अमियों की तरह मलहम लगाना।
खुद को तो बहुत जानने की जरूरत है
पर दूसरों को बहुत तरह के ज्ञान बाँट आना।
तारीफ तो कभी करना नहीं
पर नई-नई बेइज्जती करना रोजाना।
अब कितनी बातें बताऊ, गर कोई हो जाए नाराज
तो मनाने के लिए नए-नए ताने मारकर सताना।
कोई हो परेशान अपनी शादी को लेकर, तो उस वक्त
उसको छोड़ अपने कपड़ों के बारे मे सोचते रह जाना।
जरूरी काम मे नहीं पर
दावत के दिन जरूर आना।
कभी हो किसी का प्रेम-विरह
तो उसमे जश्न मनाना।
ये हसीन लम्हे एक दिन जरूर याद आएगे
कितने भी दोस्त बना लो, पर तुम सा दोस्त
नहीं मिल सकता, ये सबको बताएगे।
By Smita Roy

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