मां लक्ष्मी का साक्षात्कार
- Hashtag Kalakar
- Nov 29
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By Himani Agarwal
समुद्र पुत्री मां लक्ष्मी,
समुद्र मंथन से थी निकली,
तीनों लोकों में छाया अलौकिक प्रकाश,
ऐसा है मां लक्ष्मी का साक्षात,
वरा था जिसने प्रभु विष्णु को,
वो थी स्वयंवरा मां लक्ष्मी,
कमल का आसन हो,
गुलाब की फुहार हो,
गरुड़ पर आसीन,
मां लक्ष्मी का हर घर में वास हो,
ऐसी विनती इस अबोध की,
मां लक्ष्मी आप स्वीकारो,
सुगंधित द्रव्यों से चरण पखारूं,
छप्पन भोग पकाऊं,
स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाऊं,
बस मनोरथ यही की,
कृपा हो श्री रघु की,
रिद्धि सिद्धि संग विराजे गणपति,
पधारे विष्णु, संग हों मां लक्ष्मी।।
By Himani Agarwal

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