माँ यशोदा का प्रेम
- Hashtag Kalakar
- Dec 15, 2025
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By Anmol Sharma
क्या प्रेम का स्वरूप मात्र ममता है?
क्या कभी सोचा, माँ का दिल कितना गहरा है?
क्या उसमें छिपी कोई अनमोल परिभाषा है?
हर बंधन का अनुभव प्रेम से बनी अभिलाषा है?
क्या यशोदा के हृदय में था ब्रह्मांड का ज्ञान?
या कान्हा की मुस्कान थी उसका एकमात्र विज्ञान?
क्या वो जानती थी, कौन है उसका लाल?
क्या देखती थी वह उसमें अपना संसार?
क्या! उसने कृष्ण को ऊखल से बांध दिया?
या ममता की दृष्टि से उसे साध लिया?
क्या कान्हा को चुराया उसने भगवान से?
या भगवान ने चुना उसे इंसानों में से?
तो सोचो, क्या श्रेठतम प्रेम यशोदा का नहीं?
जो भगवान में भी सुपुत्र की छवि देख सकी?
उसकी ममता में सरलता और शक्ति का संगम है,
जिसमें कृष्ण के सब सुख-दुख समाहित हैं।
क्योंकि जिसमें बालक के लिए हो प्रेम का भंडार,
यह ही तो है एक माँ की पहचान।
By Anmol Sharma

“An impressive piece of writing—concise, meaningful, and impactful. A pleasure to read.”
“An impressive piece of writing—concise, meaningful, and impactful. A pleasure to read.”
यह कविता केवल यशोदा–कृष्ण के प्रेम का वर्णन नहीं, बल्कि मातृत्व की उस दिव्य परिभाषा को छूती है जहाँ ईश्वर भी बालक बन जाता है। हर पंक्ति में ममता की सरलता, प्रश्नों की गहराई और भावों की पवित्रता झलकती है। आपने प्रेम को दर्शन बना दिया है और दर्शन को भावना। यशोदा के माध्यम से माँ के हृदय की जो विराटता उभरी है, वह मन को नतमस्तक कर देती है। अत्यंत कोमल, गहन और आत्मा को छू लेने वाली रचना। ✨