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भाई डर गए क्या

Updated: Jan 24

By Yogesh Kumar Pradhan



भाई डर गए क्या?

नियति के दुश्वार से,

काल के अभेद प्रहार से,

छाती में चुभते तीरों से,

अवनी के क्षुब्ध,अधीरों से,

या तानों से, कृपानों से,

छाया के तने वितानों से,

जीवन के अगणित त्रासों से,

या विरोध के फेके पाशों से,

बाधाओं के बीच भंवर में

पावस तुम इस शीतलहर में

सन्नाटों से ठिठर गए क्या?

भाई डर गए क्या?




डरना तेरा काम नहीं

कायरों का जग में नाम नहीं

अभी तो अरुण ललाट है,

न तेरे शौर्य का काट है

पंखों का तू परवाज सुना,

तेरे जय की आवाज सुना

क्या तेरे आगे कोटि प्रलय

सब पुकारें तेरी जय जय।


By Yogesh Kumar Pradhan





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