बेशर्म नहीं हो तुम?
- Hashtag Kalakar
- Oct 13, 2025
- 1 min read
By Saksham Raj
न जाने लोग क्या समझा करते हैं
जो बातों-बातों में मुझे बुरा करते हैं
न कुछ किया ख़राब न कुछ बिगाड़ा है मैने
फिर भी हम उन्हें रोज़ चुभा करते हैं
सोचता हूं के दोस्त बन पाते हम उनके पर
वो सामने से मुंह मोड़ लिया करते हैं
फिर सामने से वो कुछ बोलते क्यों नहीं?
क्यों पीछे से हमेशा कहा करते हैं ?
कुछ लोग अब भी अच्छे हैं मुझे मालूम है
ये लोग न जाने कहाँ रहा करते हैं
उन्हें खबर नहीं मेरे ज़र्फ़-ए-नुमाइश का
हम जो मुत्मइन हर चीज़ सहा करते हैं
क्या फ़ायदा तेरी नेक दिली का 'क़ाबिल'
जब वो अंजान बेखबर सोया करते हैं
By Saksham Raj

This hits different ❤️🩹
Soothing!
Truly heart touching piece .
The way you translate complex feelings into simple lines is genuinely powerful.