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बात सुनो

By DEEPANSHU


क्या हुआ ! यह हिरणी सी नज़रें

क्यों नहीं मुझसे मिला रही हो ?


हमेशा कैसा है cuty से बात शुरू करने वाली

आज क्यों मेरी ज़ुबां से अलफ़ाज़ चुरा रही हो ?





क्यों कभी आधी तो कभी अधूरी

सी दिनचर्या मुझे बता रही हो ?


क्यों गुलाब सी महक कर भी

तुम पसीने में नहा रही हो ?


तुम्हारे माथे पे फिसली यह ज़ुल्फ़ें

आज क्यों खुद ही हटा रही हो ?


यह मेरी बाहों में लिपटा बदन

क्यों मुझपे गिरा रही हो ?


रुको ज़रा हमेशा दो पल और मेरे वक़्त मे से चुराने वाली।

आज क्यों दो पल पहले जा रही हो ?


जान देखो अब तुम मुझे डरा रही हो।

बता दो ना।

मुझे पता है तुम मुझसे कुछ ना कुछ तो छुपा रही हो।



By DEEPANSHU




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