बही खाता
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
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By Akanksha Mishra
मिल जाए इश्क की बही,
तो कुछ मैं भी हिसाब रख लूं,
के कुछ उधारी मेरी भी बाकी है उन पर।
जो जा के ठहरती है सिर्फ उनके चेहरे पर,
हर उस मोहब्ब्त भरी नज़र की,
उन्हें पाने की एक दुआ,
जो सौ बार बे-असर थी,
कुछ मोल तो उनका भी होगा,
जो लफ़्ज़ ना कहे,
इश्क़ के वो पाक हर्फ़,
जो आंसुओं में थे बहे।
उन रातों का भी कुछ ब्याज तो चढ़ा होगा,
जिनका सूरज,
उनके इंतज़ार में उगा होगा।
ख़ुदा मान बैठे हैं
जिसको मोहब्बत में,
हर आयत में,
जिनका नाम पढ़ते हैं,
रूबरू तो नहीं कहते कि इश्क है,
क्या वो ख्वाबों में कभी इकरार करते हैं?
ज़रा कोई लाए बही खाता,
तो ग़ौर कर के मैं भी देखूँ,
मेरे दिल के बदले में सूद कितना लिखा है?
जुदाई का हर वो लम्हा,
जो नश्तर सा चुभा है,
ज़रा देखूं इसके ज़ख्मों का,
कितना हिसाब लिखा है?
जाने लिखा है और क्या,
इस इश्क़ की बही में ,
मिल जाये तो ये देखूँ,
तेरे इश्क़ में लुटाने को,
क्या अब भी मेरा कुछ बचा है?
By Akanksha Mishra

Very gud
Really touching
Emotionally rich