प्रेम
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
- 2 min read
By Aaryan Gupta
कोई धन का प्यारा तो कोई तन का मारा ,
कोई आवारा इश्क़ की नाव में सवार है
कोई भी हरा न पाए उसको ,
जिसका प्रेम ही इकलौता वार है !
आइए उस प्रेम की कहानी सुनें,
जो सैकड़ों के लिए एक नया विचार है ,
उन राधे श्याम की दास्तां सुनें ,
जिनकी भक्ति से ये संसार है !
ये उस समय की बात है जब
राधा रमण ने क्या खूब इस जगत की रीत रची ,
एक दूजे से हार के , क्या खूब प्रेम की जीत रची !
ऐसी अमर प्रेम की कहानी लिखी उन्होंने ,
कि सदियों सदियों तक सीख मिली ,
ऐसे आलौकिक दृश्य की रचना की ,
कि कान्हा को उसकी मनमीत मिली !
गोलोक छोड़ धरती पर प्यार सिखाने आए,
खुद अपना त्याग करके , ये संसार बनाने आए !
चाँद की चाँदनी में हाथ पसारे विराजते थे वो आँगन में ,
कुछ गुनगुनाते और कुछ हँसते थे वृंदावन के दामन में
ठिठलाती थी राधा दूर खड़ी बाग़न में ,
जब कान्हा बांसुरी बजाए नए वर्ष के सावन में !
फूल झुके, पंखुरी मुस्काई,
वृंदावन का हर कोना महका था,
राधा की ख़ामोशी में प्रेम झलका,
कान्हा की बांसुरी में संसार लहका था
जिस प्रेम में ना स्वार्थ था, ना एहसान,
सिर्फ मिलन की आस और बिछड़ने का अभिमान,
और आज भी जब बांसुरी की धुन हवा में गूंजती है,
वृंदावन फिर से नाचे, मिट्टी भी खूब खनकती है,
जहां राधा‐श्याम का ज़िक्र चले,
वहां प्रेम का ये दीप युग युगांतर तक जले,
ऐसा प्रेम जो ना रूप पे था, ना साज पे,
ना अन्याय पे, ना राज पे, ना छल पे , ना राज़ पे
बस था तो उस भरोसे की डोर पे,
जो अटूट है , अछूत है , अदृश्य है , आलौकिक है ,
अमर है , अनंत है
ऐसी डोर जिसने राधा कृष्ण को युगों से युगों तक बाँधे रखा है,
एक सिरा राधा के पास , एक सिरा कृष्ण को थामे रखा है!
जहाँ मिलन से ज़्यादा स्मरण की महिमा समझी जाए,
जहाँ रहकर भी दूर, दूरी की कोई जगह नहीं ,
और बस इसी लिए, प्रेम की इस परम सत्य लीला में,
समय रुक जाता है… पर राधा‑कृष्ण का प्रेम नहीं।
कोई धन का प्यारा तो कोई तन का मारा ,
कोई आवारा इश्क़ की नाव में सवार है
कोई भी हरा न पाए उसको ,
जिसका प्रेम ही इकलौता वार है !
राधे राधे !
By Aaryan Gupta

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