प्रेम गंगा
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
- 1 min read
By Akanksha Mishra
निर्मल, निर्झर जल के जैसे,
मेरे मन को तुम पावन करते हो,
देवों के आशीष से तुम,
मुझे, गंगा से लगते हो।
वात्सल्य लगे माता जैसा,
जब हाथ कभी माथे पर रखते हो,
बनते हो आधार पिता जैसा,
मित्र सा विश्वास जगाए रखते हो,
तुम मुझे गंगा से लगते हो।
हो पूज्य तुम्हीं, पूजा भी तुम,
आनंद तुम्हीं, अश्रु धारा भी तुम,
हो जीवन का आधार तुम्हीं,
मरणोपरंत विश्राम भी तुम।
अनंत प्रेम की अविरल धारा,
मन में सतत बहाए रखते हो,
तुम मुझे गंगा से लगते हो।
By Akanksha Mishra

Beautiful...
अति उत्तम
Great work and imagination
Wah waah. So deep
👌