दिहाड़ी मज़दूर
- Hashtag Kalakar
- Nov 30
- 2 min read
By Jyotsna Sinha
सुबह सुबह जा बैठा में चौक पर,
के पर जाएगी किसी ठेकेदार की नज़र मुझपर,
तभी सामने से आ गया एक बड़ा ठेकेदार,
अपने काम के लिए करने झुण्ड को तैयार
में भी दौड़ कर उस झुण्ड में शामिल हो गया
ये काम कर लूँगा,वो काम कर लूँगा ,की गुहार लगाने लगा
पर आज किस्मत ने साथ नहीं दिया
और मुझे छोड़, ठेकेदार ने सबको चुन लिया
फिर से आकर वहीँ बैठ गया में ,
काम की आस में, वहीँ रह गया में
उम्मीद भरी नज़र से देख रहा था ,की कोई काम मिल जाए ,
एक वक़्त की रोटी का इंतज़ाम हो जाए
बैठे बैठे अब तो घंटो निकल गए ,
साथ में थे जो मजदूर,वो सब चले गए
अब तो क्या कोई बुलाएगा ??
घर चलता हूँ,आज भुखे ही ये दिन जाएगा
डबडबायी आँखों से लौट रहा था ,बस लेकर निराशा
तभी पीछे से आवाज़ आई," चलोगे क्या भैया "?? और दे दी एक आशा !!!!
"चलेंगे ना सरकार ",कह कर दिल को सुकून आ गया,
मानो इस निर्जीव शारीर में, जूनून आ गया
आंसू पोंछ तुरंत उनके साथ हो लिए ,
जितने दुःख और पीड़ा थे ,उस पल में धो लिए
जो भी कमाएँगे,भरपेट खाएँगे,
बस इसी सोच से खुश हो लिए
पहुँच गए हम वहां ,जहा हो रहा था निर्माण ,
बन रही थी बहुत सी दुकाने,और बड़े बड़े मकान
मिल गया काम मुझे भी, उठाने का पत्थर ,
और ढो लिया मैंने सारा बोझा ,अपने सर पर
चिल्ल-चिल्लाती धुप में जल रहा हैं शारीर ,
पाँव में पत्थर के ,चुभ रहे हैं तीर
भूख से पेट में आग लग रही हैं ,
इस आग को बस पानी बुझा रही हैं
फिर भी में हिम्मत नहीं हारूँगा,
बच्चो को मेरे ,भूखा नहीं मारूंगा
एक वक़्त की रोटी के साथ करेंगे मिलाप ,
इतना तो कमा सकता हैं उनका बाप
दिन ढल गयी और हो गयी हैं शाम,
मन चिंतित हैं ,के मिल जाए कल कोई काम
पर दिल खुश हैं, के मिल गयी दिहाड़ी,
आज सब साथ बैठकर खाएँगे खिचड़ी
कल फिर एक नया संघर्ष करेंगे,
काम के लिए घंटो प्रतीक्षा करेंगे,
"न-जाने कब होगी गरीबी और कष्ट दूर,
भगवान, अगले जन्म मुझे मत बनाना ,दिहाड़ी मज़दूर....
By Jyotsna Sinha

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