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तहरीर-ए-हक

By Mogal Jilani


इधर उधर न देखना

गर हमें ढुंडना हो कभी


अमनो अमा के दौर में

हम खिदमत-ए- खल्क में मिलेंगे।


या पहेली सफ में खड़े

हम तहरीक-ए-हक में मिलेंगे


या पहेले हर्फ में लिक्खे

हम तहरीर-ए-हक मिलेंगे।



गर देर हो गयी

हमे ढुंडने में कभी


तो फिर कत्र-ए-लहु बन कर

हम ख़ाके जूनू में मिलेंगे।


या ज़िक्र ए शहिदे लब पर

हम ज़िक्र ए शहिदा बन कर मिलेंगे


By Mogal Jilani



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Anas Kazi
Anas Kazi
15 oct 2023
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Wonderful

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Pathan Shakil
Pathan Shakil
15 oct 2023
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Nice

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Suresh Bariya
Suresh Bariya
15 oct 2023
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Nice

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Pathan Rk
Pathan Rk
15 oct 2023
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Nice

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Pathan Shakil
Pathan Shakil
15 oct 2023
Obtuvo 5 de 5 estrellas.

Nice

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