झूठा जहान
- Hashtag Kalakar
- Nov 25
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By Kavya Mehulkumar Mehta
यह जहान जितना प्यारा लगता है,
उतना है नहीं।
अगर होता, तो लोग क्यों रोते?
अगर होता, तो लोग क्यों छूट जाते?
अगर होता, तो लोग प्यार के लिए भीख क्यों माँगते?
यह जहान जैसा दिखता है,
वैसा है नहीं।
बना है तो यह सिर्फ
झूठ और चालाकी से।
हर कोई वैसा नहीं, जैसा वो दिखता है,
यह सब बस एक छलावा है।
सत्य तो जाने किसी कोने में खो गया,
आप और मैं बस इस खेल का
एक तुच्छ-सा भाग हैं।
By Kavya Mehulkumar Mehta

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