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गांधीजी जिंदा हैं

By Asha Jaisinghani


आज के दौर में हमने अपनी परेशानियों को दूर करने के लिए कितने तरीक़े ईजाद कर लिए हो ,।   पर फिर   भी हर बार किसी समस्या के समाधान के लिए   पर हर बार  "अहिंसा"ही बेहतर विकल्प के उबर कर सामने आती है ।इसिलिए जब "कड़े नियम ,कठोर सजा और भारी जुर्माने के बावजुद सड़कों पर जाम और एक्सीडेंट का ग्राफ बढ़ता जा रहा  है , तब गाँघीजी 2019 मे फिर अवतरित हुए हैं। हमें "जाम और एक्सीडेंट से मुक्ति दिलाने के लिए। 

अजय -कथाकार 

रोहन - अजय का दोस्त 

रंजन और सिमी - अजय के पापा -मम्मी 

देव और मोना - रोहन के पापा मम्मी 

मेरे पापा और रोहन के पापा अच्छे फ्रेंड है ।इसीलिए हम दोनों भी फ्रेंड है और हमारी मम्मियां by god बातुनी और फेकू इसलिये हर छोटी - बड़ी बात पर हमारी पार्टियों में बदल जाती है।रोहन और मुझे हमेशा फिल्मी हीरो  attrac करते है उनकी कार,बाईक्स और फैशन उनकी देखादेखी adventure byegod । अक्सर कही पँहुचने के लिए  पहले पँहुचने की  होड़ लगी रहती  है कि कौन पहले पँहुचता है ।जब कोई पहले पँहुचता तो वो बोलता मेरे डैड "सुपरमैन"तब तीनो (पापा, मम्मी और खुद)के अंदर विजेता की फिलिंग आ जाती और सामने वाले को insult feel होता उस बात का मज़ा एक नशे जैसा होता कुल मिलाकर जिन्दगी मज़े में है । अगले शुक्रवार को रोहन का जन्मदिन है और उसकी पार्टी के लिए 5 दिन का इंतजार आहा- उसने मुझसे धड़ी और अपने पापा -मम्मी से विडिओ गेम पक्का कर लिया। 

      

 मोना -देव जल्दी उठो 7बज गये है आँफिस नही जाना है क्या? 

देव -  आँफिस 10बजे जाना होता है और तुम रोज 6बजे से मेरी नींद खराब करने आ जाती हो । 

मोना - तुमसे तो रोहन अच्छा है  5:30 पर उठ जाता है। 

देव - उनको 7 बजे जाना होता है 5:30बजे उठते है मुझे 10बजे पँहुचना होता है मै 8:30 पर उँठूगा 

मोना - बिलकुल नहीं उनका स्कूल 4 किलोमिटर दूर है तुम्हारा आँफिस 20 किलोमीटर दूर उपर से ट्रेफिक फिर जल्दी जल्दी कार चलाना  हमेशा जान हल्क में रहे 10-15 मिनट पहले निकलोगे तो तो स्मूथ कार चलाओगे। 

समझें । 

देव - अच्छा बाबा तुम चाय रखो मै आता हूँ। 

मोना  - नहीं तुम अभी उठो  मेरे सामने बाद में चाय रखती हुँ वर्ना बाद मे पता चला कि तुम बैड पर सो रहे हो और चाय काढ़ा बन गई। 

देव  -प्रामिस तुम चाय रखो मै आता हुँ आज चाय को काढ़ा नहीं बनने दूँगा ।और अगर मेरे उठने से पहले काढ़ा हो गई तो मै चाय पीना छोड़ दूँगा । 

मोना नाराज होकर चली जाती है ,और देव उठर बाहर आता है ।और जल्दी - जल्दी  फ्रेश  आँफिस के लिए निकलता है । पहले मोना को आँफिस ड्राप करता है । 

मोना - आज मैने हाँफ डे लिया है कल रोहन का बर्थडे की तैयारी करके रखूँ तैयारी करनी है तुम टाइम से घर आना रोहन का गिफ्ट तुम्हें ही लाना। 

देव - मुझे याद है और चला जाता है। 

रोहन - (स्कूल से आकर पापा को फोन पर)पापा प्लीज आप आँफिस से छुट्टी लेकर आ जाओ मेरे फ्रेंड ने बताया कि जो गेम मैने आपको गिफ्ट के लिए बोला था वो बस एक ही स्टोर पर मिलता हैं और स्टोर मे सिर्फ एक ही बचा आप.जल्दी लेकर आओ अगर कल आपने मुझे वो गेम नहीं दिया तो मै बर्थडे सेलिब्रिट नहीं कँरूगा । 

देव - बेटा में बस थोड़ी देर में निकल रहा हूँ  

अब मुझे बार -बार फोन मत करना वरना मेरी नौकरी गई , थोड़ी देर बाद फिर रोहन फोन करता है कि आप कँहा हो। 

देव - बेटा में रास्ते म हूँ 1/2 घंटा लगेगा । और ट्रैफिक भी बहुत है । 

रोहन - 1/2  घंटा ? नही पापा आप जल्दी आइए  स्टोर चलना है वर्ना  गेम खत्म हो जाएगा ,अगर वो  गेम खत्म हो गया तो  मुझे वो ही गैम गिफ्ट में चाहिए । आप सुपरमेन हो फिर मेरे  "डेडसुपरमैन -"मेरे डेड सुपरमैन मेरे  डैड सपरमैन "और देव  कार की स्पीड तेज करते है और रोहन को बोलते है तभी कार के टकराने की आवाज आती.है और फोन बंद हो जाता है रोहन हैल्लो बोलता है पर आवाज.नहीँ आती रोहन दौड़कर मोना को बताता है ,मोना  घबराकर फोन करती हैं दूसरी तरफ कोई फोन उठता है और बताता है कार का एक्सीडेंट हो गया है. और पैशेन्ट सिटी अस्पताल ले गये है । 

मोना घबराकर रंजन को बताती है सब हाँस्पिटल पँहुचते है  जहाँ डाँक्टर देव के लिए साँरी बोलते है सबकी सांसें हरक सी जाती है मोना और रोहन रोने लगते है रंजन और सिमी सदमे मे और वो भी रोने लगते फिर रोहन और मोना को संम्भालते है रोहन बार -रो कर कहता मैने पापा को मारा है ।मै पापा से जिद्द नही करता तो उनका एक्सीडेंट नही होता । 

अचानक सब की जिन्दगी में ठहराव आ जाता हैं रंजन ने कई बार कोशिश बाहर ले जाने की पर मोना और रोहन ने तो  जैसे खुश होना ही नही चाहते धीरे -धीरे जिन्दगी पटरी पर आने लगी मोना आँफिस से घर ,घर से आँफिस ।रोहन स्कूल ,स्कूल से घर । 

रोहन के स्कूल में गाँधी जत्रंती मनाई जा रही है और गाँधीजी के किए प्रयासों और प्रभाव पर प्रकाश डाला जा रहा था और साथ  ही आज के संदर्भ मे उनकी लोकप्रियता अ्ंहिसा स्वच्छता के लिए गये प्रयासों प आँदोलन  से प्रभावित हुआ और उसने निश्चय किया कि वो अब एक्सीडेंट से किसी की मौत नहीं होगी। वो  उस रोज स्कूल लौटा तो  मोना को बताया अब वो रोज ट्रैफिक सिग्नल पर  जाएगा और पब्लिक  को  टैर्फिक नियम समझाएगा। 

सुनकर मोना परेशान हो जाती फिर बोलती है अगर तुम रोज जाओगे तो तुम पढाई में पिछे हो जाओगे और पापा को  बुरा लगेगा ,तुम्हारे पापा हमेशा चाहते थे कि तुय खुब पढ़ो और बड़े आँफिसर बनो ।ऐसा करते है कि जब जब तुम्हारे स्कूल की छुट्टी होगी तब तब  मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी । तुम्हारी पढाई का नुकसान नहीं होना चाहिये।रोहन खुश हो जाता हैं। तब से रोहन और मोना आँटी का सिलसिला जारी है। इसमेँ मैं, पापा और मम्मी भी सपोर्ट करते है पर कभी कभी  लेकिन रोहन और आँटी का नियम है शायद इसिलिए कि उन्होंने अंकल को खोया था । 

 

 By Asha Jaisinghani


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