करती क्या हो तुम?
- Hashtag Kalakar
- Sep 11, 2025
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By Neetu Saxena
करुणा व सहनशीलता से परिपूर्ण
प्रेम माला में संजोए सबको भरपूर्ण।
रिश्ते नाते रहे जिसके अटूट,
क्यूं समक्ष उसके आ गया ये प्रश्न कूट।
करती क्या हो तुम?
माना दिनचर्या के थे सब काम
ना था उनका कोई मुल्य ना दाम।
अनमोल है वे,अनजान नहीं तुम,
फिर क्यूं प्रश्न सदा वही प्रियतम,
करती क्या हो तुम?
अदृश्य थे हम या नहीं उन्हें कुछ याद,
जो हुए काम सब गाद।
यद्यपि यही है वो सुक्ष्म स्वाद,
बिन जिनके न होगा कोई साद।
फिर भी नित्य प्रश्न रहा वहीं,
करती क्या हो तुम?
अस्तित्व अपना किया समर्पण,
बिन पूछे बस किया अनुसरण।
जीवन के हर उतार चढ़ाव में,
किया सदा ही समर्थन।
परंतु रह गया अंत में प्रश्न शेष वही,
करती क्या हो तुम?
By Neetu Saxena

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