एक मां के सपने
- Hashtag Kalakar
- Nov 29
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By Himani Agarwal
मां है वो मोती, जिसके आगे,
पूरी सृष्टि भी है छोटी,
आसमां भी कम पड़ जाए,
जब मां अपने आंचल में छुपाए,
मां! तू कितनी नादान है,
खुद अपने ही सपनों से अनजान है,
हमारे सपनों को तू सजाती रही,
हमें ऊंचाइयों पर पहुंचाती रही,
ढूंढ ली मुस्कुराने की वजह तूने हममें ही,
और खुद अपनी ही खुशी छुपाती रही,
अपने सपने दबाती रही,
अब उठ, खड़ी हो,
तेरा सहारा अब बनूंगी मैं,
तेरे सपनों को दूंगी पंख,
चलूंगी हर कदम तेरे संग,
जो खोया है तूने जिंदगी में कहीं,
वो हासिल करेंगे मिलकर यूंही,
तेरी तरह हर ख्वाहिश,
पूरी तो ना कर पाऊंगी,
पर तेरा हाथ पकड़,
अब तुझसे तेरे सारे ख्वाब लिखवाऊंगी,
तेरी तरह वादों की पक्की,
तो ना हो पाऊंगी,
पर तेरे हर बढ़ते कदम में साथ निभाऊंगी,
जो कहता है,
तू करती क्या है दिन भर?
काम ही क्या है तुझे?
घर ही तो संभालती है!
उन्हें अब दिखाना है,
खोए हुए सपनों को मां!
अब तुझे सजाना है,
खुद अपनी पहचान को,
अब तुझे बनाना है,
अब अपना मुकाम तुझे पाना है।।
By Himani Agarwal

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