एक तलाश!
- Hashtag Kalakar
- Aug 18, 2025
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By Sonu Khan
मैंने अल्लाह को देखा एक मासूम की मुस्कान में,
पर उन्हें चाहिए था कि वो बोले उनकी ज़ुबान में।
मैंने अल्लाह को देखा एक माँ की खामोश दुआ में,
वो उलझे रहे हिज्र, हलाल और हराम की सज़ा में।
मैंने अल्लाह को देखा एक भूख से बिलखते इंसान में,
वो फिरते रहे फ़र्क़ ढूँढते मज़हब की पहचान में।
मैंने अल्लाह को देखा इंसानियत के आईने में,
वो झाँकते रहे अपने-अपने नारों के मायने में।
मैंने अल्लाह को देखा इबादत और मोहब्बत की ज़ुबान में,
वो उलझे रहे दंगे, भीड़ और सियासत की दुकान में।
मिल गया था मुझे वो हर बेआवाज़ आह में,
वो अब भी ढूँढते हैं उसे ऊँची आवाज़ में।
क्या आपने अल्लाह को देखा है?
By Sonu Khan

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