इंसान की क़या कीमत होगी
- Hashtag Kalakar
- Nov 29
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By Aditya Nandkumar Garde
जहाँ अंबानी-अडाणी जैसे व्यापारी हो,
वहाँ धरती की क्या कीमत होगी?
जहाँ मोदी जैसी सरकार हो,
वहाँ इंसान की क्या कीमत होगी?
सड़क बिके, खेत बिके, जंगल भी रातों रात बिक जाये,
फिर कौन देखें, की पुकार किसकी जिंदा होगी?
जिस देश में लोगों के रोटी का सपना अधूरा हो,
फिर भी सरकार में, क्या अर्थव्यवस्था की जयजयकार होगी?
धर्म के नाम पर बंट गए सारे आर्थिक खलिहान,
रक्त से सनी जमीं पे, क्या फसल उगाई होगी?
शिक्षा बिक जाए, अस्पताल बिक जाए, प्यासी ये जनता रहे,
इंसानियत के ताज पे, किसने ये बुराई की छाया लाई होगी?
जिंस संसद में उम्मीद के सवालों को कुचल दिया जाए,
वहाँ जनता के अधिकार किसको दिखाये देंगी?
जहाँ वोट के लिए इंसानों को बांट दिया जाए,
सरकार के खिलाफ़ क्या मोहब्बत की ढाल होगी?
जिससे देश में सच के साथ होना गुनाह हो,
वहाँ गीता की भला क्या ही पहचान होगी?
जहाँ किसान की जमीनें ही गिरवी हो,
वहाँ अनाज की थाली में क्या ही बरकत होगी?
जहाँ मजदूर का पसीना इस तरह सस्ता बिकता हो,
वहाँ क्या नेताओं की हवेली में महंगाई होगी?
जिस देश में धरती को लहूलुहान करके व्यापार हो,
वहाँ पेड़ों की छांव में क्या ही राहत होगी?
जिस देश में बाजारों में रूह बिकती हो,
वहाँ इंसानों की क्या हिफाजत होगी?
जिस देश में इंसान ने इंसानियत से मुंह मोड़ा हो,
वहाँ क्या ही सुबह होगी, और क्या ही रौशनी होगी।
By Aditya Nandkumar Garde

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