आधा आधा
- Hashtag Kalakar
- Oct 4, 2025
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By Poonam Chakraborty
आओ, आज सब आधा-आधा बाँटते हैं।
सुबह की पूजा से लेकर,
शाम की चाय तक,
माँ की दवाइयों से लेकर,
बच्चों के होमवर्क तक -
सब, आधा-आधा बाँटते हैं।
आओ,
आज आधी नींद तुम रख लो,
आज आधा बच्चा मैं सुला लूँ।
तुम आधी बातें सुन लेना,
मैं आधे मन की कह लूँ।
तुम कहते तो हो,
"मैं बराबरी में विश्वास रखता हूँ।"
तो आओ,
आज बराबरी को जीकर देखते हैं -
बिना गिने, बिना कहे,
आज बस बाँटकर देखते हैं।
सपनों की उड़ान से,
तानों के शोर तक,
कदम मिलाने की कोशिश से,
आज़ादी के विरोधाभास तक -
बिल तो बाँटे हैं कई,
आज ये सब भी आधा-आधा बाँटते हैं।
ऑफ़िस की थकान से,
रसोई की तपन तक,
बिन कहे समर्पण से,
रिश्तों में मिले समझौते तक,
एक ठंडी थाली से,
बिस्तर की गर्माहट तक -
आओ, ये सब आधा-आधा बाँटते हैं।
ज़िम्मेदारियों के ढेर से,
उम्मीदों के पहाड़ तक,
सहने की आदत से,
करने की मनाही तक -
चलो, अब ये भी आधा-आधा बाँटते हैं।
क्योंकि बराबरी
सिर्फ़ खर्चों की साझेदारी नहीं।
बराबरी -
हर रिश्ते की समझ भी है,
हर मुस्कान, हर चुप में,
हर हँसी में, हर थकान में,
हर आधे शब्द और आधे ख्वाब में,
हर काली रात में हिस्सेदारी भी है।
चलो, आज अपने आधे-आधे से
एक पूर्ण प्रेम को पाते हैं।
By Poonam Chakraborty

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