आज की नारी का रूप
- Hashtag Kalakar
- 6 days ago
- 1 min read
By Himani Agarwal
हां, नारी का रूप आज निश्चित रूप से बदल रहा है। पहले, जहां वह घर की चार दीवारी तक सीमित थी, वहीं आज वह शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, व्यापार आदि हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का लोहा मनवा रही है।
किंतु, आज यह भी देखा जा रहा है कि शिक्षित होने के साथ वह अपने मूल को पीछे छोड़ रही है, जिस घर की डोर केवल वह संभालती थी, आज! उसी से मुंह मोड़ रही है।
नारी एक उदाहरण है अपने बच्चों और समाज के लिए किंतु आज कुछ स्त्रियां, मर्दों की होड़ में अपने संस्कार ही भूल गई हैं।
हर क्षेत्र में नाम रोशन करना गलत नहीं, परंतु यह मत भूलें कि "आप ही उस पौधे की नींव हैं, जो बड़ा होकर आपको और समाज को फल देगा"।
नारी एक शक्ति है। कुछ शब्दों में इसका वर्णन कुछ इस प्रकार है--
नारी! तू गृहलक्ष्मी, तू अभिमान है,
तू ही शक्ति, तू ही समर्पण,
तुझसे ही ये जहान है,
तू रिश्तों की डोर है, तू ही सूत्रधार है,
कंधे से कंधा मिलाती, करती मर्दों से होड़ है,
तू स्वाभिमानी, तू अपराजिता,
मत भूल यही कि,
हे नारी! तू ही मर्यादा का स्रोत है।।
By Himani Agarwal

Comments