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आखिरी शिकायत!

By Amit Vijay Jadhav





जो सोने न दे वह सपने होते है से.., जो पुरे ना हो वह सपने होते है, यह सफर तय कर लिया था उसने! जिंदगी से थक हार कर मौत से रूबरू होते हुए बस्स हाथ में पकड़ी कलम से अपनी पसंदीदा डायरी के पन्नो पर कुछ लिख रहा था वह..! "मुझे माफ़ कर देना..! मुझे पता है मैं गलत कर रहा हूँ! अपनी क्या किसी और की भी जान ले लेना सही नहीं हो सकता! फिर भी.. सही और गलत की निति और अनीतियों की लड़ाई में, मैंने बस्स अपने आपको हारा हुआ और असफल होता हुआ पाया है! दो साल पहले अमन के ख़ुदकुशी के वक़्त मैं खुद अमन से नाराज़ हो गया था की वह ऐसे कैसे कर सकता है? उसे अपने माँ बाबा के बारे में सोचना चाहिए था! इतना खुदगर्ज और स्वार्थी कोई कैसे हो सकता है.? बस्स थोड़े से टेंशन से कोई कैसे हार सकता है? मुझसे क्यों बात नहीं की? हम मदत कर देते... ये और नजाने क्या क्या कहा था मैंने! पर आज मैं समझ चूका हूँ की जब तुम ज़िंदा होते हो, तकलीफ में होते हो और अकेले लड़ते रहते हो तब बाकी ज़माना बिजी होता है! तुम बड़े नेगेटिव हो रहे हो! कितनी डिप्रेसिंग हो ये कहकर दूर रहता और उससे दूर रहो तुम भी वैसे ही हो जाओगे ये कहकर लोगो को भी तुमसे दूर करने के काम में जोरो शोरों से लग जाता है! और जब तुम मर जाते हो.. तो अपने आपको संवेदनशील कहकर फेसबुक ट्विटर और व्हाट्सप्प जैसे एप्लीकेशन पे स्टेटस अपलोड कर खुद को अच्छा बताने में जुड़ जाते है! जैसे के यही है जो तुम्हारे है! मैं इन बनावटी लोगो में अब नहीं रहना चाहता.... ना मैं झूठे सपनो के चक्करो में खुद को और ज्यादा झूठा दिलासा देना चाहता हूँ.... मुझे बस्स मेरे माँ और बाबा को कहना है की आप बोहोत अच्छे हो शायद मैं आपके काबिल न बन सका. आप अपना ख्याल और मेरा ख्याल जब भी आये… बस्स हसना...!

आपका बिना सपनेवाला बच्चा,

असफल



By Amit Vijay Jadhav




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