अपनी रूह को उसके नाम लिखा
- Hashtag Kalakar
- Dec 15, 2025
- 1 min read
By Kavita Batra
मैंने, ज़िक्र में नहीं, फिक्र में, अवल दर्जे पर , उसका नाम लिखा,
एक पन्ने पर नहीं,
पूरी किताब को उसके नाम लिखा ,
इश्क और मोहब्बत नहीं है , दरमियान,
मैंने ईबादत मेें, उसका नाम लिखा ,
दर बदलने के दौर में,
मैंने, अपने अखरी के सात पलों को , उसके नाम लिखा ,
माना , एक लम्बे इन्तज़ार के बाद वो मिला है ,
मैंने अपने सब्र ए सुकून को भी उसके नाम लिखा ,
यहाँ, हक ए जागीर, बना देते हैं, रिश्तों की बेड़ियाँ बनाकर ,
मैंने फना होकर , अपनी रूह को उसके नाम लिखा ।
By Kavita Batra

Comments