अतीत और भविष्य
- Hashtag Kalakar
- Nov 28
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By Rajneesh Khohiya
कौन कहेगा कि अतीत भला रहा,
सब कहते,
“मैं कष्टों में पला।”
विपदा को झेला मैंने,
जैसे-तैसे वो समय टला।
तभी तो वीर कहलाऊँगा,
बिना संघर्षों के
मैं कैसे जाना जाऊँगा?
जग में ढोल पीट-पीट,
बन गई अब नई रीत
कि झूठा ही सही,
बस बीते दुख का ही गा गीत।
जो बीत गया, वो कौन पूछे,
अतीत का सच कौन बुझे?
अब अतीत है तो काला होगा,
विघ्न के अंधेरों ने पाला होगा।
जो आने वाला, वह भविष्य,
जो किसी ने न जाना, वह भविष्य
जुमलों का सहारा है भविष्य,
उम्मीदों की किरणों से ढका रहा,
इसलिए सुनहरा भविष्य।।
By Rajneesh Khohiya

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