अकेले चलना पसंद है मुझे
- Hashtag Kalakar
- Dec 1
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By Mitul Chauhan
अकेले चलना पसंद है मुझे,
खुद को और बेहतर जानने का समय मिल जाता है,
अक्सर बातें करता हूँ खुद से,
कि दिए नही जाते जवाब दुसरो को मुझसे ।
बात बस इतनी सी है कि,
शायद मैं कोई पेड़ हूँ,
सामने खड़ा हूँ,
ज़रा सी छाँव और कुछ फल भी दे दूँ,
लेकिन
अंदर से पूरा सड़ा हूँ ।
शांत सा बैठा नज़र आऊंगा मैं,
अकड़ टपकेगी आँखों से,
एक जंग सी छिड़ी है मन में,
जकड के रखी है सलाखों में ।
अँधेरे से ज़्यदा प्यार है मुझे,
रौशनी से कोई गिला - शिकवा नही,
रौशनी में मिलता हूँ सब से,
अँधेरे में खुद को खोज लेता हूँ कहीं ।
अकेला चला जाता हूँ कहीं,
ख्यालों कि वादियों में,
मंज़िल इसकी कोई है नही,
जीवन बीतेगा रास्तों में ।
अकेले चलना पसंद है मुझे,
खुद को जानना है मुझे,
अंधेरे में रहना है मुझे,
दूसरों से अनजान रहना है मुझे,
अकेले चलना पसंद है मुझे ।
By Mitul Chauhan

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